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●||उत्तर प्रदेश: इन तीन 3 लोगों का सबसे बड़ा हाथ "कोरोना" फैलाने में||●
April 21, 2020 • यश त्रिवेदी

यूपी की बात करें तो यहां सबसे पहला केस 2 मार्च को आगरा से आया। आगरा के बाद लखनऊ में पहला केस 12 मार्च को आया। यहां एक महिला चिकित्सक में कोरोना की पुष्टि हुई थी, जिनकी फॉरेन ट्रैवल हिस्ट्री थी ।

इसके बाद 20 मार्च को उत्तर प्रदेश में कोरोना के 23 केस सामने आए और 31 मार्च तक केसेस बढ़कर 103 हो गए। मार्च के अंत तक भी हालात काफी काबू में थे, लेकिन फिर अचानक से अगले 20 दिन में उत्तर प्रदेश कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 1100 के पार हो गई। 

◆ लखनऊ में 180 कोरोना मरीज़ों मे, 140 जमाती है

देशभर में कोरोना मरीजों की संख्या में एकदम से उछाल आया, इसका कारण तब्लीगी जमात ही है। लखनऊ इसका एक बड़ा उदाहरण है, जहां कुल 167 मरीज हैं, जिसमें से 140 मरीज जमाती हैं।

◆ आगरा में स्तिथ “पारश” अस्पताल भी ज़िम्मेदार

 

आगरा के पारश अस्पताल में एक किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीज भर्ती थी। महिला की उम्र 65 वर्ष थी और वह 15 मार्च से 2 अप्रैल तक भर्ती पारस हॉस्पिटल में भर्ती रही। यहां से रेफर होकर वह मथुरा के नयति अस्पताल में पहुँची, वहां पीड़ित महिला 4 अप्रैल को कोरोना पॉजिटीव पाई गई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और पारस हॉस्पिटल के स्टाफ, भर्ती मरीजों और मरीज के संपर्क में आए लोगों की छानबीन शुरू की गई और इन सभी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए। रिपोर्ट आने के बाद आगरा में जैसे करोना का विस्फोट हो गया। फिलहाल आगरा में कोरोना के 255 पॉजिटीव केस हैं, जिसमें 92 जमाती और 79 केस पारस हॉस्पिटल के हैं।

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◆ नोएडा में स्तिथ “सीजफायर” कंपनी

इस कंपनी में ब्रिटेन से एक शख्स ऑडिट के लिए आया था। वह शख्स कोरोना वायरस से संक्रमित था। इसके बाद कंपनी का एक कर्मचारी नोएडा जिला अस्पताल में भर्ती हुआ। उसके कुछ दिनों बाद ही उसमें कोरोना पॉजिटीव पाया गया। नोएडा में लगातार कोरोना मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होती गई। संक्रमितों में आधे से ज्यादा लोग सीजफायर कंपनी के अधिकारी, कर्मचारी या उनके कांटेक्ट के हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूपी में इस वक्त 1100 से अधिक कोरोना के मामले हैं, जिसमें 900 से ज्यादा तो सिर्फ जमाती, पारस हॉस्पिटल और सीजफायर कंपनी से जुड़े हुए हैं।