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जानिए कौन है भगवान परशुराम, जिनकी मूर्ति बनाने को लेकर यूपी में हो रहा है घमासान
August 10, 2020 • यश त्रिवेदी • उत्तर प्रदेश

 

उत्तर प्रदेश में इन दिनों 'ब्राह्मण' समाज को लेकर खूब राजनीति हो रही है. बसपा से लेकर सपा तक सभी पार्टियां इस समाज को लुभाने में जुटी हैं. ऐसा इसीलिए है क्योंकि यूपी में करीब 11 फीसदी 'ब्राह्मण वोट' हैं. इन वोटों के लिए विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद से सियासी बिसात बिछाई जा रही है. पार्टियां सियासी हित साधने के लिए अब भगवान परशुराम के नाम का इस्तेमाल करने लगी हैं। फिर चाहे मायावती हो या अखिलेश दोनों ही नेताओं ने परशुराम के बहाने ब्राह्मणों को लुभाने की सियासी चाल चली है. लेकिन आखिर कौन हैं भगवान परशुराम ?.

 

दरअसल, भगवान परशुराम को विष्णु भगवान का छठा अवतार माना जाता है.

 

भगवान परशुराम का जन्म सतयुग और त्रेता के संधिकाल में करीब 5142 वि.पू. में वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हुआ माना जाता है. वह ऋषि जमदग्नि और रेणुका की संतान थे. परशुराम समेत ऋषि के पांच पुत्र थे. माना जाता है कि उनका जन्म वर्तमान में यूपी के बलिया के खैराडीह में हुआ था. इस संबंध में पुरातात्विक साक्ष्य भी प्रस्तुत किए जाते हैं.

 

हालांकि, दूसरी मान्यता ये है कि भगवान परशुराम का जन्म इंदौर के पास महू से कुछ ही दूरी पर स्थित जानापाव की पहाड़ी पर हुआ था. वहीं तीसरी मान्यता ये है कि छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में घने जंगलों के बीच स्थित कलचा गांव में उनका जन्म हुआ था. वहीं, कुछ लोग यूपी के शाहजहांपुर के जलालाबाद में स्थित जमदग्नि आश्रम से करीब दो किलोमीटर पूर्व दिशा में स्थित हजारों साल पुराने मन्दिर को भगवान परशुराम की जन्मस्थली मानते हैं.

 

परशुराम ने शास्त्रों की शिक्षा अपने दादा ऋचीक और पिता जमदग्नि से ग्रहण की थी. वहीं, शस्त्र चलाने की शिक्षा राजर्षि विश्वामित्र से ग्रहण की. परशुराम भगवान योग, वेद और नीति में पारंगत थे.

 

मान्यता है कि भगवान परशुराम ने 21 बार धरती क्षत्रियों से मुक्त कर दिया. हालांकि, यह धारणा गलत बताई जाती है. जानकारी के मुताबिक जिन राजाओं से परशुराम का युद्ध हुआ उनमें हैहयवंशी राजा सहस्त्रार्जुन इनके सगे मौसा थे. परशुराम के पिता जमदग्नि का राजा सहस्त्रार्जुन से कई बातों को लेकर विवाद था. बताया जाता है कि हैहयवंशियों का राजा सहस्रबाहु अर्जुन भार्गव आश्रमों के ऋषियों को सताया करता था. ये विवाद इतना बढ़ा कि सहस्रबाहु के पुत्रों ने जमदग्नि के आश्रम की कामधेनु गाय को कब्जा लिया. साथ ही परशुराम पिता का भी वध कर दिया. इसके बाद परशुराम ने बदला लेने की कसम खाई. जिसके बाद परशुराम ने 36 बार युद्ध किया और हैहयवंशियों का नाश किया. इसीलिए क्षत्रियों के नाश की मान्यता पड़ी.

 

चिरंजीवी हैं परशुराम

मान्यता है कि भगवान परशुराम चिरंजीवी हैं. उन्होंने कठिन तप किया जिसके बाद भगवान विष्णु ने उन्हें चिरंजीव होने का वरदान दिया. माना जाता है कि वे कल्प के अंत तक पृथ्वी पर ही तपस्यारत रहेंगे.